बुधवार, 13 नवंबर 2013

आज काल फ़ैशन के जबाना

आज काल फ़ैशन के जबाना
एती वोती आना अऊ एती वोती जाना
टुरा मन ल देखबे ता बछवा कस घुमत हे
संझा-संझा भट्ठी माँ दारू सुंघत हे
बड़े भाई ला धमकावत हे
छोटे बहिनी ला चमकावत हे
काम बुता बर कहिबे ता
ढोडिया कस अटियावत हे
नाक ला छेद डारिस
कान ला बेध डारिस
पहिर डारिस
खिनवा अऊ बारी
मूड मा बांधे टुरी कस चोटी
बेंच डारिस लोटा अऊ थारी
टुरी ए का टुरा ए
जेकर नई हे ठीकाना
एती वोती आना अऊ एती वोती जाना
कुरता ला देखबे ता डूठरी - डूठरी
फुलपेंट ला देखबे ता हाथीपाँव
मने मन गुनत रहिते
कहाँ आंव कहाँ जांव -कहाँ आंव कहाँ जांव
रात दिन के घुमई माँ करिया कुकुर कस करियागे
पुराना जमाना के फैशन इकर बर तरियागे
ये छत्तीसगढ़ ए बाबु बने बने पहिन
उखर सही सीख जइसे गाँधी जी रहीन
नहीं ते नदिया कस धार मा
धारे धार बोहा जाबे
धोबी मन के कुरता काचे कस
कोनो मेरा कचा जाबे
आज काल के टुरी मन -घलो नई हे कम
दाई ददा ला चिन्ता हे -जेखर नई हे गम
ददा कहिथे पढ़त भर पढ़ाबो
दाई कहिथे टुरी बिगड़त हे
भईगे गोबर बिनवाबो
टुरी कालेज करहु कहिके अडियाये हे
कपड़ा के दुकान मा जींस ला फरियाये हे
अपन ददा ला कहिथे येदे ला लेबे
ये आज कल के फैशन ऐ
येदे हा मोर मितानिन पहिनते तइसन ऐ
टुरी के दाई देखिस वहु भड़कगे
आगी लगावव तुहर फैशन कहिके
दिमाक सरकगे
आगी लगावव तुहर फैशन कहिके
दिमाक सरकगे
रचनाकार -सूरजभान
सहयोग - जितेन्द्र कुमार

3 टिप्‍पणियां:

  1. वाह .. आंचलिक भाव का अपना ही मज़ा है ...

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. बिल्कुल सही कहा आपने नसवा जी आंचलिक भाव का अपना ही मजा है और अंचल में बात हो ३६ गढ़ी की तो उसमें और ज्यादा मजा है

      हटाएं
  2. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

    जवाब देंहटाएं

फ़ॉलोअर